गुरुवार, 3 सितंबर 2020

जीव और जीवन का रहस्य

(लेखक - रामदेव द्विवेदी)  जीव जन्म लेता है, बढता है, साथ ही आवश्यकता भी बढती है! अपने आवश्यकता की पूर्ती के लिए जीव यानी मनुष्य हर प्रयत्न करता है,  जिसमें कुछ तो सफल हो जाते हैं, लेकिन ज्यादा तर लोग अपने जीवन को बोझ की तरह ढ़ोते हैं! ऐसा इस लिए होता है क्योंकि लोग अंधविश्वास और अहंकार तथा भ्रम की जाल में फंस जाते हैं! इतिहास गवाह है कि बिना कर्म किये फल नहीं मिलता है! रहा सवाल ऊपर वाले में आस्था रखने का तो यह भी जरूरी है,  क्योंकि सब कुछ ऊपर वाले का ही है! हर जीव का जीवन और उसके उपयोग और उपभोग की हर चीज़ ऊपर वाले का है, और उसी के अधीन है, इसलिए उस ऊपर वाले से यदि किसी को कुछ चाहिए तो सबसे पहले उसको ऊपर वाले का नमन करना चाहिए, उसके बाद अपने लक्ष्य को पाने का हर प्रयत्न करना चाहिए,  ताकि सफलता मिल जाए!  अब प्रश्न यह उठता है कि ऊपर वाले का नाम और स्वरूप क्या है?  तो इसमें अनेक धर्म ग्रन्थों के मुताबिक वह एक होते हुए भी अनेक स्वरूपों में है, और लोग उसे अनेक नामों से  पुकारते हैं!  ..... (शेष..  अगले प्रकाशन में) 

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